बुढापा हो,
औऱ उस पर
बीमारी हो,
औऱ कोई सहारा
भी न हो,
जेब में दो कौड़ी भी न हो,
सड़क के किनारे
पड़ा हुआ शरीर हो,
उसे देखकर
यदि आपका मन
आपको झकझोरता है
तो आप
इंसान हैं।
राह चलती
कोई बिटिया
सुनहरे स्वप्न लेकर
चल रही हो,
आप उसको
कुदृष्टि से देखते हैं
तो आप हैवान हैं।
आप क्या हैं
Comments
4 responses to “आप क्या हैं”
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बहुत ही भावपूर्ण कविता है जब मानव के अंदर सहानुभूति का एहसास होता है वही अनुभूति मानव को सच्चे मानव बनाती है
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सहानुभूति का भाव लिए सुंदर रचना
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सहानुभूति के भाव लिए हुए संजीदा रचना है कवि सतीश जी की
इंसानियत को समझने वाली सुन्दर रचना -
अतिसुंदर
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