कलम

कलम और पेन से अभी नाता कब का छूट चुका है
अभी ज़माना ईमेल और मोबाइल का है
छोटे उन पन्नो में अपनी भावनाएं सारी लिखने की नौबत अभी नहीं आती
अभी तेरे ख़तों में तेरी खुशबु ढूंढने का अहसास नहीं रहा
बहुत कुछ खो दिया है अभी के ज़माने ने या पाया है बहुत कुछ।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Hi Everyone, I am from Kolkata.Land of culture and heritage.These are my creations.Please post your comment if you like it

14 Comments

  1. Pragya Shukla - May 18, 2020, 12:57 pm

    Good

  2. Priya Choudhary - May 18, 2020, 2:42 pm

    वाह 👏

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 18, 2020, 3:02 pm

    Nice

  4. Pragya Shukla - May 18, 2020, 8:41 pm

    👌👌

  5. Abhishek kumar - May 19, 2020, 12:12 am

    Good

Leave a Reply