कल किसने देखा कल आये या ना आये

कल किसने देखा कल आये या ना आये
आज की तू परवाह कर ले कही यह भी चला ना जाये
देख परायी चुपड़ी तेरा मन क्यों ललचा जाय
पास तेरे जो है तू उससे मन को समजाये
रुखा सूखा जो कुछ है कही वह भी छूट ना जाए
कल किसने देखा कल आये या ना आये

आज तेरा है जो वह कल था और किसी का
आने वाले कल मैं वह होगा और किसी का
फिर उस जगह पर अपना हक़ क्यों जताये
कल किसने देखा कल आये या ना आये

करम किये जो तूने उसका फल भी यही मिलेगा
आज नहीं तो कल सब कुछ यही मिलेगा
बोया पेड़ बबूल का तो आम कहा से खाये
कल किसने देखा कल आये या ना आये

जैसी करनी वैसी भरनी रीति तो है यह पुरानी
अंत समय सब याद करते अपनी भूली कहानी
गुजर गया जो वक़्त अब लौट कभी ना आये

कल किसने देखा कल आये या ना आये
आज की तू परवाह कर ले कही वह भी चला जाए

पंकज प्रिंस


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

कवि का समर्पण

शहीद को सलाम

चाहता हूँ माँ

हिन्दी सावन शिव भजन 2 -भोला जी की भंगिया |

13 Comments

  1. Kanchan Dwivedi - March 13, 2020, 1:21 pm

    Nice

  2. Pragya Shukla - March 13, 2020, 3:30 pm

    Good

  3. Dhruv kumar - March 13, 2020, 4:21 pm

    Nyc

  4. Priya Choudhary - March 13, 2020, 10:03 pm

    Nice 👍✍

  5. NIMISHA SINGHAL - March 14, 2020, 5:42 am

    Nice

  6. महेश गुप्ता जौनपुरी - March 21, 2020, 10:30 am

    वाह बहुत सुंदर

Leave a Reply