कितनी बातें अनकही रह जाती है
कितने लम्हे बिना जीए ही बीत जाते है
सोचते सोचते दिन महीने साल
धीरे धीरे सब गुजर जाते है
कितनी बातें अनकही रह जाती है

Comments
3 responses to “कितनी बातें अनकही रह जाती है”
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khubsurat!!
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वाह बहुत सुंदर रचना
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बहुत खूब, बहुत शानदार
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