किराये का मकान

बात उन दिनों की है

जब बचपन में घरोंदा बनाते थे

उसे खूब प्यार से सजाते थे

कही ढेर न हो जाये

आंधी और तूफानों में

उसके आगे पक्की दीवार

बनाते थे

वख्त गुज़रा पर खेल वही

अब भी ज़ारी है

बचपन में बनाया घरोंदा

आज भी ज़ेहन पे हावी है

घर से निकला हूँ

कुछ कमाने के लिए

थोड़ा जमा कर कुछ ईंटें

उस बचपन के घरोंदे

में सजाने के लिए

यूं बसर होती जा रही है ज़िन्दगी

अपने घरोंदे की फ़िराक में

के उम्र गुज़ार दी हमने

इस किराये के मकान में

अब तो ये अपना अपना

सा लगता है

पर लोग ये कहते हैं

चाहे जितना भी सजा लो

किराये के मकान को

वो पराया ही रहता है

ज़रा कोई बताये उनको

की पराया सही पर

मेरे हर गुज़रे वख्त का

साक्षी है वो

भुलाये से भी न भूले

ऐसी बहुत सी यादें

समेटें है जो

बहुत कुछ पाया और गवाया

मैंने इस किराये के मकान में

इसने ही दिया सहारा जब

मैं निकला था अपने घर की

फ़िराक में

मैं जानता हूँ के एक दिन

ऐसा भी आएगा

जब मेरा अपने घरोंदे

का सपना सच हो जायेगा

और मेरा ये किराये का

मकान फिर किसी और का

हो जायेगा

मैं जब कुछ भी नहीं था

तब भी तू मेरे साथ था

आज जब मैं कुछ हो गया

तो तेरा मुझसे रिश्ता न भुला

पाउँगा

तुझे सजाया था पूरे

शानो शौक़त से

तू किसी का भी रहे

पर तुझसे अपनापन

न मिटा पाउँगा

मैं देखने आया करूंगा तेरा

हाल फिर भी

गुज़रा करूंगा तेरी गलियों से

रखने को तेरा दिल भी

मैं एहसान फरामोश नहीं

जो तेरी पनाह भुला पाउँगा

अपने अच्छे बुरे दिन को याद

करते

हमेशा तुझे गुनगुनाऊँगा

उस बचपन के घरोंदे की हसरत

को साकार करने में

तेरी अहमियत सबको न

समझा पाउँगा

Related Articles

दुर्योधन कब मिट पाया:भाग-34

जो तुम चिर प्रतीक्षित  सहचर  मैं ये ज्ञात कराता हूँ, हर्ष  तुम्हे  होगा  निश्चय  ही प्रियकर  बात बताता हूँ। तुमसे  पहले तेरे शत्रु का शीश विच्छेदन कर धड़ से, कटे मुंड अर्पित करता…

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

Responses

New Report

Close