कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

कुछ कहने की कोशिश में है अहसास मिरे

उमडने को आतुर है ज़ज्बात मिरे

वो तो अल्फ़ाज़ हैं कि कहीं खोये हुए है

नहीं तो इक नज़्म लिख देते अश्क मिरे

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