कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर

कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर

कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
कुछ दिनों को भी जोड रखा है
शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें

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5 Comments

  1. Panna - October 24, 2015, 2:56 pm

    उम्दा..बेहतरीन

  2. Anjali Gupta - October 26, 2015, 8:03 pm

    so nice…mukul

  3. Mohit Sharma - November 6, 2015, 9:31 pm

    nice

  4. nitu kandera - November 26, 2019, 11:15 am

    G

  5. nitu kandera - November 26, 2019, 11:15 am

    Good

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