कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर By Mukul Gagrani Posted on October 24, 2015November 26, 2018 Category : हिन्दी-उर्दू कविता कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर क्या पता कभी कोई कविता बन जायें कुछ दिनों को भी जोड रखा है शायद कहीं ये भी कभी जिंदगी बन जायें kavita
कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर क्या पता कभी कोई कविता बन जायें Waah waah, very nice poem Log in to Reply
उम्दा..बेहतरीन
so nice…mukul
nice
G
Good
कुछ लफ़्ज़ ठहरा रखे हैं कागज पर
क्या पता कभी कोई कविता बन जायें
Waah waah, very nice poem