कैसे कहूँ?

कैसे कहूँ, किससे कहूं कि हाल ए दिल क्या है,
रोना अकेले ही है अंजाम ए बयान क्या है।
जब तक खुश रहती हूँ, लोगों की हंसी सुनाई देती है।
जब दुखी होती हूँ बस अपनी चीख सुनाई देती है।
बाते बहुत है पर डर लगता है कुछ कहने से,
बहुत से किस्से हैं दिल के कोने में सहमे से।
डर लगता है लोग क्या कहेंगे, क्या सोचेंगे मेरी बाते सुनकर।
इसीलिए मैंने भी खुद को छुपा लिया कुछ किरदार चुनकर।
खुदको खोने का डर भी सताता है,
आइना भी अब किरदार ही दिखाता है।
दुःख है भी तो बयान नही हो पाता है,
किरदार मेरा दर्द छुपाना ही सिखाता है।
पास हूं मैं बहुत से लोगों के, कुछ लोग मेरे लिए जरूरी हैं।
पर किसी से कुछ न कह पाना पता नहीं कैसी मजबूरी है।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

Related Posts

मेरे लफ्ज़

मोहलत

कविता कहना छोड़ा क्यों ?

कहाँ है हमारी संवेदना

14 Comments

  1. Vasundra singh - June 20, 2020, 9:33 pm

    आइना भी अब किरदार ही दिखाता है
    bahut khoobsurat kavita

  2. Annu Mittal - June 20, 2020, 9:35 pm

    nice

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 20, 2020, 9:52 pm

    Nice

  4. Pragya Shukla - June 21, 2020, 10:47 am

    👌

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - June 21, 2020, 6:02 pm

    बहुत सुंदर

  6. Abhishek kumar - July 10, 2020, 11:22 pm

    बातें।👌

  7. Abhishek kumar - July 31, 2020, 2:46 am

    आपकी पंक्तियां अतुल है कला पक्ष और भाव पक्ष से भी ज्यादा मजबूत है

Leave a Reply