गीत कोई गा रही हूँ
छेड़ कर तार दिल के
प्रीत के धागे है सुन्दर
अश्क के मोती पिरोकर
मन-गगन महका रही हूँ ।
गीत कोई
Comments
14 responses to “गीत कोई”
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सुन्दर प्रस्तुति
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Thank
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Good
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Thanks
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👌👌✌✌
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Thx
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सुन्दर रचना
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Nice
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