8 Comments

  1. वाह, कवि सतीश जी ने आज गऊ माता पर बहुत ही सुन्दर पंक्तियां लिखी हैं ।”पावन होता है आंगन।कहते ज्ञानीजन यह भी
    भवसागर पार लगाती हो इहलोक में अमृत देती वह लोक सजाती हो।”
    सत्य ही है गऊ माता का दूध भी अमृत के समान ही है । बहुत सुंदर भाव, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति ।

    1. इस सुंदर समीक्षा के लिए हार्दिक धन्यवाद। कविता के भाव को इस सटीक तरीके से विश्लेषण करने पर आभार, गीता जी।

  2. गाय में सभी देवताओं का निवास होता है ऐसी है हमारी भारतीय संस्कृति….
    बहुत भावपूर्ण रचना

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