छोटी सी मुलाक़ात

वह छोटी सी मुलाक़ात
विचरती रहती है अक्सर
स्मृतियों में मेरी ।

जब सिमट आए थे तुम
मेरी पलकों के दायरे में,
सकुचाते हुए,
छोटे-छोटे कदमों से…
मुस्कुराती हुई कोई बहार
उतर आई हो
किसी वीरान उपवन में जैसे ।

सुनो न !
एक बार फिर से भर दो
मन की सूनी टहनियों में वही फूल
तितलियों से एकाकी आकाश
और फ़िज़ाओं में उन्हीं साँसों की महक ।
सदियों तक रहेगा इंतज़ार
कभी फिर से आ जाना
उसी उपवन की देहरी पर,
सकुचाते हुए,
छोटे-छोटे कदमों से चलकर
ऐ बहार !

Related Articles

प्यार अंधा होता है (Love Is Blind) सत्य पर आधारित Full Story

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥ Anu Mehta’s Dairy About me परिचय (Introduction) नमस्‍कार दोस्‍तो, मेरा नाम अनु मेहता है। मैं…

दायरे

दायरे ____ **** दायरे थे ही नहीं मानव की लालसा के! हर तरफ फैलाव था पैर पसारे। जीव सीमट रहे थे दायरो में…. लुप्त और…

Responses

New Report

Close