सीता का हाँथ देते समय
जनक ने कभी नहीं सोचा होगा
की जनक दुलारी सीता
यूंँ वन में कष्ट भोगेगी
कन्द मूल खायेगी
और घास की सेज पर सोयेगी
पर होतब्यता देखो
यह सब हुआ और
कोई रोंक ना पाया
इस निर्मम दृश्य को सब
देखते रह गये
जनक दुलारी
Comments
7 responses to “जनक दुलारी”
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Nice
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थैंक्स
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Nice
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थैंक्स फॉर कमेंट्स
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वाह बहुत सुंदर
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Nice
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Nyc
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