जमाने लगे

हिन्दी गजल- जमाने लगे |
जिस बस्ती बसाने मुझे जमाने लगे |
बेदर्दी वो मकाने दिल गिराने लगे |
जब भी गुजरे वो राहे मंजिल मेरे |
लेकर नाम उनका हम बुलाने लगे |
सबब रूठने वो मुझको बताता नहीं |
मिला आशिक नया दास्ता सुनाने लगे |
रहती उदास बिन आपके कहते थे |
मेरी हर यादों लम्हो वो भुलाने लगे |
लाल बिंदिया लाल सिंदूर धरे रह गए |
पकड़ गैर हाथ मांग वो सजाने लगे |
है कितना दर्दे दिल उसे मालूम नहीं |
जख्मी दिल हम उनको दिखाने लगे |
रहो जहा खुश रहो मेरी जान हो तुम |
तोड़ा दिल किसी ने आँसू बहाने लगे |
तू नही तेरी तनहाई है खुश हूँ मगर |
जुदा हुये कितने दिन हम गिनाने लगे |
आयेगा लौटके एक दिन वो देखना |
रोता हुआ भारती वो गले लगाने लगे |

श्याम कुँवर भारती [राजभर] कवि ,लेखक ,गीतकार ,समाजसेवी ,

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