जवाँ सी जवाँ है

हवा आजकल कुछ जवाँ सी जवाँ है,
दिले धड़कनें भी जवाँ सी जवाँ है।
उदासी नहीं रख कहीं मन लगा ले,
अभी तो जवानी जवाँ सी जवाँ है।
अंधेरा तुझे रोक पाये कभी ना
खिली रोशनी जब जवाँ सी जवाँ है।
कि भार्या तुम्हारी, इसी भांति खुश हो,
मुहोब्ब्त तुम्हारी, जवाँ सी जवाँ है।


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6 Comments

  1. Ramesh Joshi - October 18, 2020, 10:16 pm

    वाह सर वाह

  2. Piyush Joshi - October 18, 2020, 10:20 pm

    वाह सर आपने सरसता का संचार कर दिया

  3. Devi Kamla - October 19, 2020, 7:43 am

    बहुत सुंदर रचना पाण्डेय जी

  4. Geeta kumari - October 19, 2020, 8:03 am

    बहुत सुंदर और सरस काव्य रचना है कवि सतीश जी की।
    ज़िन्दगी की सच्चाइयों से रूबरू करवाती हुई बहुत सुंदर रचना

  5. MS Lohaghat - October 19, 2020, 10:12 am

    बहुत ही बढ़िया सर

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 20, 2020, 11:32 pm

    अतिसुंदर

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