बिटिया रानी

छोटी सी है बिटिया रानी
ऐसी लगती बड़ी सयानी,
अपनी ही भाषा में जाने
क्या कहती है गुड़िया रानी।
वॉकर में बैठाओ कहती
उसमें पांव टिकाकर चलती
खड़े नहीं हो पाती है पर
करती है काफी शैतानी।
कहती है बस गोदी में लो
इधर घुमाओ उधर घुमाओ,
चीजों को मुंह में लेती है,
धूम मचाती गुड़िया रानी।
थोड़ी देर पकड़ती गुड़िया
छम छम छम झुनझुना बजाती,
जिससे खेल लिया फिर उससे
ऊबने लगती गुड़िया रानी।
भूख लगी तो सायरन देती
प्यास लगी तो होंठ बताते,
मम्मी उसकी समझ लेती है
चाहती क्या है गुड़िया रानी।

Comments

21 responses to “बिटिया रानी”

  1. वाह बहुत ही लाजवाब, वात्सल्य से भरपूर

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  2. वात्सल्यमयी रचना

    1. सादर धन्यवाद

  3. Suraj Tiwari

    बहुत खूब रचना

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  4. Vasundra singh Avatar

    बहुत बढ़िया

    1. सादर धन्यवाद

    1. सादर धन्यवाद जी

  5. Geeta kumari

    अरे वाह, कवि सतीश जी ने छोटी सी गुड़िया रानी पर बहुत ही सुन्दर कविता रची है। छोटे बच्चों की हर बाल सुलभ घटनाओं का बहुत ही खूबसूरती से वर्णन किया है । अति सुंदर भाव और लय बद्ध शैली से परिपूर्ण अति सुंदर रचना

    1. इस सुन्दर और बेहतरीन समीक्षा हेतु हार्दिक धन्यवाद गीता जी, आपकी इस समीक्षा शक्ति को सादर अभिवादन।

    1. सादर धन्यवाद

  6. बहुत सुन्दर सर वाह, वात्सल्य रस सजा है

    1. बहुत बहुत धन्यवाद

  7. Harish Joshi

    क्या खूब रचना है। मज़ा ही आ गया।गुड़िया रानी की कारगुजारियां पढ़कर दिल खुश हो गया।

    1. सादर नमस्कार, और धन्यवाद जी

  8. Saurav Tiwari

    Bhut sundr kavita

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