जहाज

सहारा चाँद को भी एक दिन लगाने चल दिया,
कुछ समझ आया नहीं बस समाझाने चल दिया,

मैं ज़मी पर रहा और आसमाँ झुकाने चल दिया,
उम्मीदों का रुका हुआ जहाज उड़ाने चल दिया।।

राही अंजाना


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12 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 21, 2019, 8:34 pm

    Nice

  2. देवेश साखरे 'देव' - November 21, 2019, 11:31 pm

    वाह

  3. nitu kandera - November 22, 2019, 12:23 am

    Wah

  4. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:16 pm

    बेस्ट

  5. Neha - November 24, 2019, 7:51 pm

    Wsh

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