ज़रिया

बूँद-बूँद से मैं दरिया बन जाऊँ।
तिश्नगी का मैं ज़रिया बन जाऊँ।
डूबाने की मंशा बिलकुल नहीं है,
ज़िन्दगी का मैं नज़रिया बन जाऊँ।

देवेश साखरे ‘देव’


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6 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 11, 2020, 8:14 am

    Nice

  2. Priya Choudhary - January 12, 2020, 7:10 pm

    Good

  3. Kanchan Dwivedi - January 12, 2020, 8:02 pm

    Nice

  4. NIMISHA SINGHAL - January 13, 2020, 2:48 am

    Wah

  5. Abhishek kumar - January 13, 2020, 3:16 pm

    Nice

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