जुस्तजू

आज की रात कयामत की रात है।
गर तुम हो मेरे साथ तो जन्नत की बात है।।
थी जुस्तजू तुम्हें पाने को मगर।
क्या करू सब की अपनी मुकद्दर है।।
डर है मुझे कहीं ए चिराग बुझ न जाए।
इसलिए हवा के रुख बदलने का इरादा है।।


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7 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 3, 2020, 1:48 pm

    Nice

  2. Priya Choudhary - May 3, 2020, 4:33 pm

    Nice

  3. Dhruv kumar - May 5, 2020, 10:24 am

    Nyc

  4. Pragya Shukla - May 8, 2020, 10:19 am

    👌👌

  5. Abhishek kumar - May 8, 2020, 1:39 pm

    Good

  6. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:34 pm

    बहुत खूब

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