तुम्हें क्या पता के हमें
छोड़ कर तुमने क्या खोया है
कोहिनूर को शीशा समझ कर
तुमने हीरा खोया है।
सिर्फ़ उसे पाने की खातिर
जो चन्द दिनों के लिए
तेरा है।
तुम्हें क्या पता
Comments
17 responses to “तुम्हें क्या पता”
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Wah
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Thanks
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सुंदर भाव
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Thanks
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So nice
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Thanks
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Good
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Thanks
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Good
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Thanks
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Good
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Thanks bhai
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भावपूर्ण
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Thanks
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दिल की बात
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Good
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Very nice
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