तुम धूप बुला लो

आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो,
तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो,
अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम,
ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।।

copyright@ नील पदम्

Comments

10 responses to “तुम धूप बुला लो”

    1. धन्यवाद आपका

    1. नील पदम्

      Thank you

  1. नील पदम्

    आपका धन्यवाद

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