तुम धूप बुला लो

आँसुओं से भीगे हुए, तकिये को हटा लो,
तुम आस के रूठे हुए, पंछी को बुला लो,
अन्मनी रातों के चांद बुझा दोगे तुम,
ये रात ढ़ल जायेगी गर, तुम धूप बुला लो ।।

copyright@ नील पदम्


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10 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 1, 2019, 7:34 am

    Nice Nice

  2. Abhishek kumar - December 1, 2019, 10:03 am

    Good

  3. Neha - December 1, 2019, 12:00 pm

    bahut khoob

  4. देवेश साखरे 'देव' - December 1, 2019, 5:44 pm

    वाह

  5. नील पदम् - December 1, 2019, 7:14 pm

    आपका धन्यवाद

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