तूफ़ान

सागर के सीने पर उठने वाले
ये विकराल तूफ़ान,
वास्तव में उसकी पीड़ाएँ हैं,
जो रह-रह के उद्वेलित होती रहती हैं,
उस नदी की प्रतीक्षा में
जिसे सागर में विलीन होने के पहले ही
सोंख लिया किसी प्यासे रेगिस्तान ने..!!
©अनु उर्मिल ‘अनुवाद’

Comments

7 responses to “तूफ़ान”

  1. Chandra Pandey

    साहित्य की दृष्टि से अति उत्तम

  2. राकेश पाठक

    Nice

  3. Chandra Pandey

    साहित्य की दृष्टि से उत्तम रचना

  4. खूबसूरत  कविता

  5. Amita

    बहुत सुंदर

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