दुःखी आत्मा….!!

निस्तेज-सी
स्तब्ध-सी
असहाय-सी
अधूरी-सी
निर्वेद-सी
बैठी थी..
दुनिया की सबसे दुःखी आत्मा
मैं ही थी…
आपा खोकर भी मौन थी
तुमसे दो टूक
करने के बाद
सारे ऱिश्ते खत्म करने
के बाद
क्रोध में आकर
फेंक दिया मैंने
छत से अपना प्यारा फोन!!

बैटरी अलग
ढक्कन अलग
यूं बिखर गया..
उठाया, समेटा, जोड़ा
पर ना खुला
ना चला
टूटा तो नहीं परन्तु
आह !
मेरा फोन भी तुम्हारे प्यार में
मेरी तरह अन्धा हो गया..
ना वो बनवा पाई
ना दूसरा ही खरीद पाई…!!


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10 Comments

  1. Geeta kumari - September 21, 2020, 7:51 pm

    क्रोध की सटीक अभिव्यक्ति….पर फ़ोन तो ना तोड़ती ।

    • Pragya Shukla - September 21, 2020, 7:57 pm

      पहले खुद कूदना चाहती थी फिर सोंचा फोन फेककर देखूं..
      फोन की हालत देखकर इरादा बदल दिया..
      हा हा हा.
      सिर्फ कल्पना है दी
      फोन नहीं फेकूगी दूसरे का वरना फिर मांगे भी नहीं मिलेगा

      • Geeta kumari - September 21, 2020, 8:34 pm

        ये हुई ना बात👏

  2. Satish Pandey - September 21, 2020, 9:28 pm

    बहुत खूब, सुन्दर अभिव्यक्ति

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 21, 2020, 10:28 pm

    बहुत खूब

  4. Rishi Kumar - September 21, 2020, 11:08 pm

    🤔🤔✍👌👌🤝

  5. प्रतिमा चौधरी - September 23, 2020, 4:32 pm

    Very nice poetry

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