धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है

धीरे धीरे चलने से राहे बन जाती है
छोटी छोटी बातों से यादें बन जाती है
जरा कोशिश तो कर के देख
चंद लफ़्जो ओ अहसासों से नज्म बन जाती है|

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