“नहीं देखा”

ღღ_मोहब्बत करके नहीं देखी, तो ये जहाँ नहीं देखा;
मेरे महबूब तूने शायद, पूरा आसमां नहीं देखा!
.
तुझमें खोया जो एक बार, फ़िर मिला नहीं कभी;
खुद की ही तलाश में मैंने, कहाँ-कहाँ नहीं देखा!
.
मंज़िल की क्या ख़ता जो, भटकता रहा मैं ही;
की जिधर रास्ता सही था, मैंने वहाँ नहीं देखा!
.
मेरे शहर के सब लोग, अमनपसंद हो गये शायद;
एक अरसे से किसी घर से, उठता धुआँ नहीं देखा!
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नासमझ हो तुम “अक्स”, जो मासूम समझते हो;
उनका हुस्न तो देखा तुमने, उनका गुमाँ नहीं देखा!!….‪#‎अक्स‬
.

 


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7 Comments

  1. Aaditya kumar - June 23, 2016, 1:59 am

    Behtareen ankit ji

  2. Panna - June 23, 2016, 11:43 am

    nice one!!

  3. Krishna yadav - June 23, 2016, 5:55 pm

    bahut khoob …

  4. Vasundra singh - June 24, 2016, 12:10 am

    bahut sundar

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