पंचकन्या

अहिल्या द्रोपदी तारा कुंती और मंदोदरी।
सदाकाल कन्या ये पांचों सर्वपाप कर हरी।।

Related Articles

द्रोपदी

जिसका जन्म हुआ यज्ञ की प्रज्वलित अग्नि से जो द्रुपद की पुत्री कहलाई फूलों की नर्म सेज पर सोई एक दिन हुई पराई जिसके स्वयंवर…

Responses

New Report

Close