पथ के राही न भटक

=राही पथ से न भटक=योगेश ध्रुव”भीम”
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अडिग मन राह शांत हो,
निश्छल जीवन लेकर चल,
चाहे भटके मन: चंचल,
जीवन नाथ के तू चल,
पथ के राही न भटक
ऐसे पथ में तू चल ||

न डिगा अपना नियत,
ऐसे नियति बना कर चल,
मिला जीवन सौभाग्य पूर्ण यह,
दुर्भाग्य गर्त में न डाल के चल,
पथ के राही न भटक,
ऐसे पथ में तू चल ||

लक्ष्य ऐसा अडिग कल्पना ,
ऐसे मूरत बना के चल,
कल्पना की कामयाबी,
सकार जीवन लेकर चल,
पथ के राही न भटक,
ऐसे पथ में तू चल ||

अंतिम पड़ाव उस जीवन की,
ऐसा मूरत बना कर चल,
जन मानस की मन:पटल पर,
ऐसे चित्र उकेर कर चल,
पथ के राही न भटक ,
ऐसे पथ में तू चल ||

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