पहला प्यार

ना मेरे हाथों में था लहू ,

ना लगी थी मेहेंदी उसके हाथों में ,

ना जाने क्यों फिर भी रंग था गहरा ||

 

ना वो अकेली थी ना मै अकेला था ,

था वहाँ घने लोगो का पहरा ||

 

कुछ लोगो की घूरती आँखें …

कुछ की थी तिरछी नजरें …

वो थी सहमी, था मै भी सहमा ||

 

ना मेरे हाथों में था लहू,

ना लगी थी मेहेंदी उसके हाथों में ,

ना जाने क्यों फिर भी रंग था गहरा ||

 

शायद थी नजरों की ही गुस्ताखी …

या थी दो दिलों की नादानी …

पर था वो प्यार मेरा पहला ||

~ सचिन सनसनवाल

Comments

10 responses to “पहला प्यार”

  1. Ajay Nawal Avatar
    Ajay Nawal

    bahut ache dost 🙂

    1. SACHIN SANSANWALL Avatar
      SACHIN SANSANWALL

      धन्यवाद दोस्त 🙂

  2. Rohan Sharma Avatar
    Rohan Sharma

    first sight..first smile..first love…first awesome experience 🙂

    1. SACHIN SANSANWALL Avatar
      SACHIN SANSANWALL

      🙂

  3. Panna Avatar
    Panna

    jaandaar…jabardast..jindabaad 🙂

    1. SACHIN SANSANWALL Avatar
      SACHIN SANSANWALL

      🙂 Dhanywad 🙂

  4. Anjali Gupta Avatar
    Anjali Gupta

    awesome 🙂

    1. SACHIN SANSANWALL Avatar
      SACHIN SANSANWALL

      Thanks 🙂

  5. Satish Pandey

    कुछ लोगो की घूरती आँखें …

    कुछ की थी तिरछी नजरें …

    वो थी सहमी, था मै भी सहमा ||
    बहुत खूब

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