फ़ासले

गमे-जुदाई किसी से बाँटी नहीं जाती।
बगैर तेरे ये रातें अब काटी नहीं जाती।
मिटा दो फ़ासले, जो हमारे दरम्यान है,
गहरी कितनी खाई, जो पाटी नहीं जाती।

देवेश साखरे ‘देव’


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13 Comments

  1. Hemant Rana - December 29, 2019, 6:43 pm

    Super

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 29, 2019, 7:30 pm

    Nice

  3. Amod Kumar Ray - December 29, 2019, 7:57 pm

    खुब

  4. Abhishek kumar - December 30, 2019, 7:02 am

    Good

  5. Pragya Shukla - December 30, 2019, 7:15 am

    Nice one

  6. Kanchan Dwivedi - March 6, 2020, 2:02 pm

    Nice

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