बंधा है मन मेरा खयाल में जो आपसे

बंधा है मन मेरा खयाल में जो आपसे

हुआ है यह बे-खयाल हर जमाल से

                            …… यूई

Related Articles

मुक्तक

अज़ब बेकरारी हो जाती है हर शाम को! हऱ घड़ी जुबाँ पर लेता हूँ तेरे नाम को! दर्द की जंजीर से जकड़ जाती है जिन्द़गी, खोजता हूँ हरलम्हा मयक़शी के जाम को! Composed By #महादेव

Responses

New Report

Close