बे-वफा

उनके मस्त अदाओं के जाल में,हम गिरफ्तार हो गए।
जुस्तजू के मेले में हमारी मुकद्दर, हम से ही खफ़ा हो गए।।
वफा से बे -वफा बनेंगे वो , हमने ऐसा सोचा ही कब था ।
हम तो बस उनके लिए छोटा सा महल बनाने में लग गए।।
बने थे कभी वो मेरे दोस्त, मेरे हमदम, मेरे इब्तिदा ।
उनके मुस्कान को हम इश्क़ के सिलसिला समझने लग गए।।


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 25, 2020, 9:05 pm

    Nice

  2. Dhruv kumar - April 26, 2020, 6:23 am

    Nyc

  3. Abhishek kumar - May 10, 2020, 10:25 pm

    Good

  4. Satish Pandey - July 12, 2020, 2:34 pm

    बहुत सुन्दर

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