भटकता बचपन

रोटी के निवाले के लिए बचपन अपना खो दिया,
भूख की तड़प से मासूम बेचारा रो दिया।
दिन रात एक करके लगा है देखो पैसा कमाने,
अपने बचपन की सारी खुशियां हंसकर लुटा दिया।।

✍ महेश गुप्ता जौनपुरी


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4 Comments

  1. Pragya Shukla - May 16, 2020, 7:33 pm

    Good

  2. Abhishek kumar - May 16, 2020, 7:37 pm

    👏

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - May 16, 2020, 8:37 pm

    Nice

  4. Praduman Amit - May 16, 2020, 8:48 pm

    बहुत खूब।

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