भारती

भारत माता
सुनो वीरों की कहानी,
अपनो  का जो हुए शिकार l
कालापानी सावरकर को मिला,
हृदय तोड़ने वाला दर्द मिला l
सहम उठा दिल मेरा,
अनूठा देश प्रेम जो देखा l
मन विभोर हो उठा,
इतिहास के बदले स्वरूप जो देखा l
सपूतों से इतिहास ने साजिश रचा,
मै कुछ ना कर पाया, कुछ न कर पाया ll
सुभाष का क्या बोलूँ ,
मेरे लिए दरदर भटकते रहा l
पराक्रम से दुश्मनों को धूल चटा‍या,
आजादी का पहला तिरंगा लहराया l
उसे भी अपनो का धोखा मिला,
इतिहास तो छोड़ो भारतीय मुद्रा ने भी साजिश रचा l
लक्ष्मीवाई, राणा प्रताप जैसे वीरांगना,
दुश्मनों के हलक से कलेजे निकाले l
आजाद, खुदीराम जैसी वीरों ने अंग्रेजो के  नींव हिलाए,
इन वीरों के नाम साजिश के काल मे समाए l
मै कुछ ना कर पाया, मै कुछ न कर पाया ll
एक लाल ने मुझे दोबारा खंडित होने से बचाया,
विडम्बना देखो मेरा लाल देशद्रोही कहलाया l
जो मेरे टुकड़े किए, वो राष्ट्रपिता कहलाया,
साजिशकर्ता देश का बागडोर संभाला l
पर मेरे लाल को तो मुझसे प्यार था,
न की इतिहास, न ही राजपाट से l
दिल में राष्ट्रभक्ति समाहित था l
दिल में राष्ट्रभक्ति समाहित था ll

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