भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |

भोजपुरी गजल- मन भईले बौराइल| |
काढ़ी करेजा हथेली थमाइ तबो ना उनके बुझाइल |
प्यार मे उनका पागल भईली दिल भइल घाइल |
हटेला ना अँखियाँ से रूपवा तोहार का करी हम |
हंसला से मुहवा मोती झरे लेली जान मुसकाइल |
तोहरा जोहत सांझ ढली गईली हो गईले अनहार |
वादा कइके काहे ना अइलू हमरो मन मुरझाइल |
लहरावेलु कन्हिया कारी केसिया बदरा लगले लजाये |
चाल चलेलु हिरनी जस जंगल मन भईले बौराइल|
याद मे तोहरी बरसे नयन बहरा सावन के फुहार |
आके हमके गरवा लगा ल मनवा फुले ना समाइल |
सुना सुना लागे जग बिना तोहरे हिया हहरत बा |
जिनगी आई बहार गोरी जब आके अंगना सजाईल|

श्याम कुँवर भारती (राजभर)
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो झारखंड मोब -9955509286


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11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 24, 2020, 9:27 pm

    निम्मन गजल वा

  2. Priya Choudhary - July 25, 2020, 8:50 am

    बहुत सुंदर

  3. Neha - July 25, 2020, 9:15 am

    Nice

  4. Suman Kumari - July 25, 2020, 11:54 am

    सुन्दर

  5. Satish Pandey - July 25, 2020, 5:17 pm

    तोहरे हिया हहरत, गईली हो गईले, आदि में अनुप्रास से अलंकृत, चाल चलेलु हिरनी जस, में उपमा व अलंकार का समन्वय से अलंकृत सुन्दर श्रृंगारमयी रचना है। बहुत खूब

    • Shyam Kunvar Bharti - July 25, 2020, 10:32 pm

      सतीश पाण्डेय जी राऊर हृदयतल से आभार बा हमार रचान के बड़ाई करे खातिर

  6. Abhishek kumar - July 30, 2020, 9:34 pm

    क्षेत्रीय भाषा का प्रयोग करते हुए सुंदर रचना

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