भोजपूरी पारंपरिक होली गीत – गोकुला के दुआर |

भोजपूरी पारंपरिक होली गीत – गोकुला के दुआर |
कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर |
करा ना साजन तू हमके इनकार |
कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर |
बितले जड़वा आइल बहार बसंती |
निरखे रूपवा तोहार हम तरसी |
बहे लागल हो देखा फगुआ बयार |
कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर |
हाथ जोरी कान्हा कहे तोहसे राधा |
होरी खेलब तोहसे नाही होई बाधा |
श्याम करा तनी हो अब हमरो विचार |
कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर |
रंगवा लगाइब तोहे अबिर हम लगाइब |
भरी पिचकरिया छलिया तोहे हम रंगाईब |
तनि खेलिहा हमसे हो फगुआ के फुहार |
कान्हा आवा हाली हो गोकुला के दुआर |

श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि /लेखक /गीतकार /समाजसेवी
बोकारो, झारखंड,मोब- 9955509286


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6 Comments

  1. Satish Pandey - February 19, 2021, 8:43 am

    अति सुन्दर प्रस्तुति

  2. Geeta kumari - February 19, 2021, 12:16 pm

    होली पर सुंदर रचना

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 19, 2021, 5:55 pm

    अतिसुंदर भाव

  4. Shyam Kunvar Bharti - February 20, 2021, 1:17 am

    haardik aabhaar aapkaa

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