मतलब की धूल

वख्त की तेज़ धूप ने
सब ज़ाहिर कर दिया है
खरे सोने पर ऐसी बिखरी
की उसकी चमक को
काफ़ूर कर दिया है

जब तक दाना डालते रहे
चिड़िया उन्हें चुगती रही
हुए जब हाथ खाली तो
उसकी चोंच ने ज़ख़्मी कर दिया है

जब तक मेज़बान थे
घर में रौनक लगी रही
शामियानों के बुझते ही, इस मेहमान नवाज़ी
ने मेरे घर का क्या हाल कर दिया है

ये सुरमई धूप अपने संग
बहार ले कर आई है, जिसने
दोस्ती पे चढ़ी मतलब की धूल को
उजागर कर दिया है
वख्त की तेज़ धूप ने
सब ज़ाहिर कर दिया है ……

अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”


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5 Comments

  1. Priya Choudhary - February 12, 2020, 11:25 am

    वाह सच्चा एहसास👏👏

  2. Kanchan Dwivedi - February 12, 2020, 11:36 am

    Wah ji wah

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - February 12, 2020, 3:43 pm

    Nice

  4. Anita Mishra - February 13, 2020, 9:59 am

    🤗🤗

  5. NIMISHA SINGHAL - February 13, 2020, 12:25 pm

    Kya baat

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