मिथिलाधाम

पूव बहति कोशी महारानी
उत्तर पर्वतराज हिमालय ।
पच्छिम गंडकी गंग नारायणी
दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।।
मध्य विदेहक धाम विराजित
सुन्दर अति सुखधाम।
‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।


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3 Comments

  1. Pragya Shukla - May 28, 2020, 12:53 pm

    Good

  2. Abhishek kumar - May 29, 2020, 9:16 am

    Good

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