पूव बहति कोशी महारानी
उत्तर पर्वतराज हिमालय ।
पच्छिम गंडकी गंग नारायणी
दक्षिण सुरसरि गंग नीरालय।।
मध्य विदेहक धाम विराजित
सुन्दर अति सुखधाम।
‘विनयचंद ‘ई छथि मिथिलाधाम।।
मिथिलाधाम
Comments
3 responses to “मिथिलाधाम”
-

Good
-

वाह
-
Good
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.