मुझको सो जाने दो जीवन !!

मुझको सो जाने दो जीवन
रात हुई अब बहुत घनी

नैनों से ओझल हैं सपनें
साँसों से भी ठनी-ठनी

आसमान बाँहें फैलाकर
मेरे स्वागत को आतुर है

धरती पर बस बोझ बनी हूँ
मिट्टी में मिल जाने दो

रो-रोकर धो दिए दाग हैं
मैंने सूखे अश्कों के

ओ तकिये ! मेरे आँसू पोंछो
तन्हाई मुझको जाने दो !!

मुझको सो जाने दो जीवन
मिट्टी में मिल जाने दो ||

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Responses

  1. रात को दिन में बदल दे
    निराशा को उत्साह में बदल दे।
    बहुत संवेदना युक्त पंक्तियाँ।
    वाह

  2. न हो उदास हमारी युवाशक्ति
    कठिनाइयों से भिड़ जा
    जीत पा बिंदास रह
    ऐसे मत उदास रह।
    रात के बाद सवेरा निश्चित
    कदम चूमेगा
    तेरे हिस्से का सुख
    तेरे कदमो को चूमेगा।
    इन पंक्तियों के साथ काव्य प्रतिभा को सैल्यूट

  3. नारी हो निराशा नहीं,
    टूटे ना तेरी आशा कहीं।
    निशा है तो ,नव- प्रभात भी आएगा
    तेरी जीत का सुखद संदेशा लाएगा।
    मेरी दुआएं हैं ये बहना,
    याद रखना मेरा ये कहना।

  4. निराशा भी जीवन का हिस्सा है मगर कहीं ना कहीं तो दबी हुई है आशा भी
    उस आशा (उम्मीद) को हिम्मत दीजिए फिर वही उम्मीद आपको हिम्मत देगी
    जीवन के रूखेपन में फैली निराशा को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है अति सुंदर रचना

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