मेहमा

कमरा तो कोई दिखता नहीं इस दिल में मगर,
हम फिर भी मेहमाँ कई इसमें बिठाये फिरते हैं,

क्यों देखने पर भी कुछ नज़र नहीं आता हमको,
आढ़ धर्म की लेकर हम खुदको छिपाये फिरते हैं।।

राही

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13 Comments

  1. Astrology class - November 5, 2019, 11:39 am

    Nice

  2. NIMISHA SINGHAL - November 5, 2019, 12:07 pm

    Good

  3. देवेश साखरे 'देव' - November 5, 2019, 2:04 pm

    वाह

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 5, 2019, 3:57 pm

    वाह बहुत सुंदर

  5. Poonam singh - November 6, 2019, 3:42 pm

    Good

  6. nitu kandera - November 8, 2019, 9:17 am

    Wah

  7. Neha - November 10, 2019, 2:33 pm

    Waah

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