रईस

कोई काली कमा के रईस हो जाता है
कोई सबकुछ लुटा के रईस हो जाता है
दुनिया का दस्तूर निराला है
यहां तो दिल का लुटेरा भी रईस हो जाता है|

Published in शेर-ओ-शायरी

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