लाॅकडाऊन vs शराब

मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।
मर रहा था, अब बेहतर हो गया।।

कल जो खाने की तलाश में, कतार में थे खड़े।
आज उनके भी कदम, मयकदे को चल पड़े।
चेहरे से लाचारी का झूठा नकाब,
शराब देख कर रफूचक्कर हो गया।
मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।

हुक़्मरानों का हर हुक़्म सर आँखों पे सजाया।
मौत के सामान का सौगात, फिर क्यों पाया।
बगैर इसके हमारी साँसे तो रुकी नहीं,
सरकार का हाल क्यों बदतर हो गया।
मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।

जहाँ घर से निकलने पर थी सख्त पाबंदी।
हर गली चौराहे पर थी कड़ी नाकेबंदी।
फिर क्यों सड़कों पर खुला छोड़ दिया,
डूब कर शराब में तर बतर हो गया।
मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।

शराब के दम पर देश की अर्थव्यवस्था बचाएंगे।
महामारी का खौफ, क्या अब भूल जायेंगे।
हिफाज़त की बात अब कहाँ चली गई,
कथनी और करनी में क्यों अंतर हो गया।
मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।

मुफ़लिसी के दौर से अभी कई गुज़र रहे।
यह अपना सरकारी खजाना भर रहे।
शराब की तलब में कहीं ऐसा न हो,
कि जुर्म करने पर आतुर हो गया।
मुद्दतें बाद आज गला तर हो गया।

देवेश साखरे ‘देव’


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13 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 9, 2020, 6:54 am

    वाह जी वाह
    कमाल है

  2. Panna - June 9, 2020, 8:07 am

    bahut khoob sir

  3. Pragya Shukla - June 9, 2020, 10:00 am

    Nice

  4. Pragya Shukla - June 9, 2020, 10:02 am

    👌

  5. Abhishek kumar - July 12, 2020, 11:49 pm

    👏👏

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