वक़्त

कम्बख्त वक़्त ये नहीं कटता
वक़्त का रुख हर वक़्त बदलता

-विनीता श्रीवास्तव(नीरजा नीर)-

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बेवजह

कम्बख्त वो हमारे सामने बेवजह ही मुस्कुरा गऐ बेवजह ही हम उनकी बाहोँ में आ गऐ खबर न थी जमाने को इस नए चमन से…

मुक्तक

अज़ब बेकरारी हो जाती है हर शाम को! हऱ घड़ी जुबाँ पर लेता हूँ तेरे नाम को! दर्द की जंजीर से जकड़ जाती है जिन्द़गी, खोजता हूँ हरलम्हा मयक़शी के जाम को! Composed By #महादेव

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