सारा जहान बाक़ी है

थक कर बैठ गया क्यूं राही,
क्या अभी थकान बाक़ी है?
नहीं मिलती मंज़िल आसानी से,
अभी इम्तिहान बाक़ी है।
जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी,
घबराना नहीं है तुझको, अभी सारा जहान बाक़ी है
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11 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - July 28, 2020, 12:07 pm

    सुन्दर

  2. Satish Pandey - July 28, 2020, 4:22 pm

    वाह, बिना थके हारे, मंजिल की ओर बढ़ने को प्रेरित करती सुन्दर कविता है

  3. Geeta kumari - July 28, 2020, 6:02 pm

    समीक्षा के लिए धन्यवाद सर 🙏

  4. Abhishek kumar - July 30, 2020, 8:25 pm

    जीवन के संग्राम पर उत्तम रचना

  5. Devi Kamla - September 7, 2020, 6:21 pm

    Great

  6. Piyush Joshi - September 24, 2020, 4:25 pm

    वाह जी वाह

  7. Indu Pandey - September 24, 2020, 4:29 pm

    very nice

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