थक कर बैठ गया क्यूं राही,
क्या अभी थकान बाक़ी है?
नहीं मिलती मंज़िल आसानी से,
अभी इम्तिहान बाक़ी है।
जीवन के संग्राम में , मिलेगी शह और मात भी,
घबराना नहीं है तुझको, अभी सारा जहान बाक़ी है
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सारा जहान बाक़ी है
Comments
11 responses to “सारा जहान बाक़ी है”
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सुन्दर
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धन्यवाद 🙏
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वाह, बिना थके हारे, मंजिल की ओर बढ़ने को प्रेरित करती सुन्दर कविता है
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समीक्षा के लिए धन्यवाद सर 🙏
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जीवन के संग्राम पर उत्तम रचना
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Great
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Thank you ji🙏
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वाह जी वाह
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Thanks Allot Piyush ji 🙏
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very nice
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Thanks Allot Indu ji 🙏
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