स्वतंत्रता का नव विहान

स्वतंत्रता का नव विहान
गाओ मंगल गान!
लहराते ध्वज को देखो-
स्वाभिमान भरे मस्तक ऊँचे!
याद करो वीरों की कुर्बानी!
ज़ुल्म भरे व्यथा की कहानी।
चहुदिश अरुण रश्मि छायी-
धरती पर स्वर्ण-आभा आई !
बरस रहे सुधा रस राग रंग
जनता में खुशियों की पुरवाई!
गगन-धरा-अनिल-क्षितिज
प्रदिप्त हो रहे मंगल दीप!
त्याग-बलिदान की ज्योति जले
कभी न बुझ पाए ये अमर दीप !
बँटवारे का दर्द समेटे
आज भेद भाव सब छूटे।
जननी नव दुल्हन सी सजी !
हर रही क्लेश-विषाद सब।
अत्याचार का ह्वास हुआ-
जनतंत्र की जीत हुई!
विश्वमंडल की नयी आभा
भारतवर्ष बन गया आज !
महावीर-बुद्ध के संदेशों को

फैला रहे हम विश्व में आज!
शान्ति के अग्रदूत बन
बढ़ा रहे भारत की शान।
मेरा भारत महान !
गाओ मंगल गान-
मेरा भारत महान !!

-शीला तिवारी

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