हिन्दी कविता- समय गिन रहा |

हिन्दी कविता- समय गिन रहा |
लोक डाउन हुआ है हर कोई
समय गिन रहा है |
खत्म कब होगा बाहर का बनवास |
हर कोई समय गिन रहा है |
खाये जा रहा डर कोरोना का |
कोई कोरोना योद्धा बन लड़ रहा |
जान की फिक्र नहीं अपनी
वाइरस खात्मे का दवा जड़ रहा |
हर कोई समय गिन रहा है |
जब रहते बाहर घर आने को
मन ललचता था कब जाए|
बीबी बच्चो माँ पिता जी खातिर
कुछ लेकर जाये उनसे मिल पाये|
अब घर मे रहना ही हमे खल रहा |
हर कोई समय गिन रहा है |
बाहर तो खतरा है कोरोना का |
कोई आ ना जाए पोजिटिब कोरोना का |
हर घड़ी भय उसका पल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
लगे है सारे चिकित्सक प्रसासन शाषन |
लड़ने की जंग कोरोना को भगाएँगे |
प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री राज्यमंत्री सभी |
भुजाए अपनी कोरोना तौल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
लड़ी लड़ाइया कितनी ये भी जीत लेंगे|
आता जो दुशमन सामने कबका मैदान
मार लिए होते हम सब |
अदृश्य दुश्मन खून सबका खौल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
हुआ लोक डाउन सबको साथ निभाना है |
घर मे ही रहना सबको बाहर नहीं जाना है |
खत्म होगी कहानी कोरोना एक दिन |
होगी रौनक बाजार माल मुहल्ले मसिन |
दिल सबका अब ये बोल रहा है |
हर कोई समय गिन रहा है |
श्याम कुँवर भारती (राजभर )
कवि/लेखक /समाजसेवी
बोकारो झारखंड ,मोब 9955509286
व्हात्सप्प्स -8210525557

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