हिमालय के उतुंग शिखर से

हिमालय के उतुंग शिखर से
सिंह ने भरी ऊँची दहाड़ है
तूफान क्या टकराएगा उससे
जो स्वयं फौलादी पहाड़ है
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
सौगंध इस लाल ने खाई है
भारत की पवित्र माटी की
फिर से लौट आएगी महक
हरी-भरी कश्मीर घाटी की
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
इस कर्मयोगी का साहस देख
सारा ब्रह्माण्ड भी शरमाया है
उसके कुशल नेतृत्व ने आज
साडी दुनिया को भरमाया है
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
कर्मपथ से भटक जाये कभी
इस सिपाही का ये धर्म नहीं
अपने कर्तव्य से विमुख होना
माँ ने सिखाया ऐसा कर्म नहीं
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
निकल पड़ा है लेकर प्रतिज्ञा
इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा
झुकने न दूंगा माथा इसका
लहू देकर हर फ़र्ज़ निभाउंगा
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
धरती से अंतरिक्ष तक आज
भारत एक चमकता तारा है
दुश्मन ने जब आँख दिखाई
घर में घुसकर उसको मारा है
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
बनकर सारथी समर भूमि में
हर युवा को इसने जगाया है
तरकश के अभेद्य तीरों से
आतंक का किया सफाया है
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा
वक्त कम मगर सफ़र लम्बा है
रुकना नहीं बस चलते जाना है
आज का सूरज ढलने से पहले
हर हाल में लक्ष्य को पाना है
सारे जहाँ में अब भगवा ही लहराएगा
माटी का लाल अब तिरंगा फहराएगा

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