ख़त

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है
एक लिफाफे में उसे रखवाया है
देखने में कोरा न लगे,इसलिए
उस लिफाफे को खूब सजाया है

जो पहुचेगा वो उनके हाथों में
रख देंगें वो उसे किताबें में
सोचेंगे की क्या पढूं ,
जब ख़त के अन्दर का हाल
लिफाफे की सजावट में उभर आया है
मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है
एक लिफाफे में उसे रखवाया है

सोचती हूँ कोरा इसे जो छोड़ देती
तो क्या उनके मन को कचोट पाती
चमकते लिबास ने ढांक रखा है
उदास रूह का हाल
और इस चेहरे को हंसी से सजाया है
मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है
एक लिफाफे में उसे रखवाया है

ख़त के भीतर कुछ खास नहीं
तुम कैसे हो ,कोई परेशानी की बात तो नहीं ?
अपने बारे में क्या लिखती
मेरा हाल वो इस लिफाफे से जान ही लेंगे
हूँ उनके ख़त के इंतजार में , क्या ये वो मान लेंगे
क्योंकि उनके पिछले ख़त का जवाब भी
अब तक न पहुँच पाया है
मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है
एक लिफाफे में उसे रखवाया है

मैंने उन्हें एक ख़त भिजवाया है
एक लिफाफे में उसे रखवाया है
देखने में कोरा न लगे,इसलिए
उस लिफाफे को खूब सजाया है…

अर्चना की रचना “सिर्फ लफ्ज़ नहीं एहसास”


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9 Comments

  1. Abhishek kumar - January 7, 2020, 10:06 pm

    Good

  2. NIMISHA SINGHAL - January 8, 2020, 9:38 am

    ❤️❤️❤️❤️

  3. Abhishek kumar - January 8, 2020, 10:04 am

    Good

  4. Pragya Shukla - January 8, 2020, 10:12 am

    Nice

  5. Kanchan Dwivedi - January 8, 2020, 3:58 pm

    Very nice

  6. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 8, 2020, 8:20 pm

    Nice

  7. Archana Verma - January 8, 2020, 8:55 pm

    Thank you all of you… 🙂

  8. PRAGYA SHUKLA - January 9, 2020, 8:02 pm

    👌👌👌👌

  9. देवेश साखरे 'देव' - January 10, 2020, 7:43 pm

    सुन्दर

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