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  1. कवि “शास्त्री” जी द्वारा प्रस्तुत यह शायरी स्वयं के दिल को दरिया की तरह बड़ा कहने वाले सहृदय को चुनौती दे रही है । ये पंक्तियाँ पाठक के दिल की धड़कन बढ़ाने और उसे थामने पर आमादा प्रतीत होती हैं। तत्सम शब्द व जनप्रचलित शब्दों का उचित तालमेल है। भाव प्रधान पंक्तियाँ हैं। बहुत खूब

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